शुक्रवार, 23 जून 2017

अनिरुद्ध सिंहा की कुछ गजलें

         
    अनिरुद्ध सिंहा की कुछ बेहतरीन गजलें


                 
   अनिरुद्ध सिन्हा

जाँ बदन से जुदा  है रहने दे
ये जो मुझसे खफ़ा है रहने दे

एक न एक रोज़ हादसा है यहाँ
अब वहाँ क्या हुआ है रहने  दे

छोड़ अब  हुस्न-इश्क़  की बातें
ये  फसाना  सुना  है  रहने दे

अपनी सूरत से मत डरा मुझको
सामने  आईना   है  रहने  दे

छेड़खानी  न  कर  वफ़ाओं से
वो अगर  बेवफ़ा  है  रहने दे

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राह की  दुश्वारियों  के रुख  बदलकर देखते
जिस्म घायल ही सही कुछ दूर चलकर देखते

नींद में ही मोम बनकर ख़्वाब से की गुफ्तगू
दोपहर की  धूप में  थोड़ा  पिघलकर  देखते

कुछ तजुर्बों के  लिए  ही दोस्तो इस दौर में
देश की मिट्टी कभी  माथे पे मलकर  देखते

बेबसी की  बाजुओं में  जाने  कब से क़ैद है
चंद लम्हों के  लिए  बाहर निकलकर देखते

उम्र भर जलते रहे  जो  रंजिशों की आग में
वो मुहब्बत के चिरागों  में भी जलकर देखते


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लोग  पीछे थे  मेरे  हाथ में पत्थर लेकर
मैं कहाँ  भागता  शीशे का बना घर लेकर

प्यास  सहरा  में  बुझा देंगे ये मेरे  आँसू
मैं तेरे  साथ हूँ  आँखों  में समुंदर  लेकर

ऐसे  हालात  में जज़्बात भी मर जाते  हैं
लोग मिलते  हैं जहाँ  हाथ में खंज़र लेकर

फिर चिरागों को बुझा दे न हवाओं का जनून
घर में  बैठे रहे  सब  रात का ये डर  लेकर

ये मुहब्बत का सफ़र तन्हा सफ़र  रहता  है
कौन चलता है यहाँ साथ  में  लश्कर लेकर


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रगों  में रेत  भरकर  रोज़ घटता जा रहा है
वो दरिया तो किनारों  से लिपटता जा रहा है

मेरा ये दायरा  जब से सिमटता  जा रहा  है
मेरा किरदार भी अब मुझसे कटता जा रहा है

ये दुनिया तो हमेशा  की तरह रंगी  बहुत  है
न जाने  क्यों हमारा  दिल उचटता जा रहा है

नई तहजीब  अपना  क़द बढ़ाती  जा रही  है
पुराना  जो  है  धीरे-धीरे  हटता  जा रहा  है

वो जाहिल था वो जाहिल है वो जाहिल ही रहेगा
किताबों के  वो बस  पन्ने पलटता जा रहा  है


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जो आँसू पीके हँसना जानता है
मुहब्बत को  वही  पहचानता है

पड़े हैं पाँव में  जिसके भी छाले
सफ़र की वो हक़ीक़त जानता है

भरम  कल टूट जाएगा तुम्हारा
फ़रिश्ता कौन किसको मानता है

वो किसकी याद लेकर बस्तियों में
गली की ख़ाक हर दिन छानता है

शहर में फिर रहा हूँ अजनबी सा
कोई मुझको  कहाँ पहचानता  है


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इजहारे-मुहब्बत  की जो हिम्मत नहीं करते
वे  लोग  ज़माने  से  बगावत  नहीं करते

खुशबू से जिन्हें इश्क़ है लुट जाते हैं लेकिन
काँटों से किसी  हाल में  उल्फ़त नहीं करते

हर हाल  में रिश्तों  की  ये सांसें  रहे ज़िंदा
हम जुल्म तो सहते हैं शिकायत  नहीं करते

बेचैन  बहुत  होते  हैं  वो  रातों में अक्सर
जो अपने  उसूलों  की हिफाज़त नहीं  करते

सच-झूठ  का  अंदाज़  लगा लेते हैं हम भी
माना कि  अदालत  में  वकालत नहीं करते

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दिखाई दे न  जो उसका हिसाब क्या रखता
अँधेरी रात में  सूरज का ख़्वाब क्या रखता

हरेक बार  की  फूलों  से  जिसने गुस्ताखी
मैं उसके हाथ में दिल का गुलाब क्या रखता

वो मेरा दोस्त था हमदम था जाँनिसार भी था
मैं उसके सामने कोई  हिजाब  क्या  रखता

किसी चिराग की लौ में न ख़ुद को पहचाना
सियाह रात में रुख पर नकाब  क्या रखता

हरेक  सिम्त  की  मजबूरियों  के  घेरे में
हवा के रुख पे ग़मों की किताब क्या रखता


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उलझनों से  तो कभी प्यार से कट जाती है
ज़िंदगी वक़्त की  रफ्तार से  कट  जाती है

मैं   तो   क्या   हूँ   मेरी   परछाई  भी
रोज़  उठती  हुई दीवार  से  कट  जाती है

यूँ तो मुश्किल है बहुत इसको मिटाना साहब
दुश्मनी प्यार  की  तलवार से कट  जाती है

सारी  बेकार  की  खबरें  ही छपा करती  हैं
काम की बात तो अखबार से कट  जाती है

इतना  आसान नहीं प्यारे मुहब्बत   करना
ये वो गुड़िया है जो बाज़ार से कट जाती है

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परिचय
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नाम –अनिरुद्ध सिन्हा
जन्म -2 मई 1957
शिक्षा –स्नातकोत्तर
प्रकाशित कृतियाँ
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-(1)नया साल (2)दहेज (कविता-संग्रह )(3)और वे चुप हो गए (कहानी-संग्रह) (4)तिनके भी डराते हैं (5)तपिश (6)तमाशा (7)तड़प (8)तो ग़लत क्या है (ग़ज़ल-संग्रह)(9)हिन्दी-ग़ज़ल सौंदर्य और यथार्थ (10)हिन्दी-ग़ज़ल का यथार्थवादी दर्शन(11)उद्भ्रांत की ग़ज़लों का सौंदर्यात्मक विश्लेषण(12)हिन्दी ग़ज़ल परंपरा और विकास (13)हिन्दी ग़ज़ल का नया पक्ष (आलोचना )
सम्पादन-
साहित्यिक पत्रिका “समय  सुरभि” और ”,जनपथ “ के ग़ज़ल विशेषांक का सम्पादन
“किसी-किसी पे ग़ज़ल मेहरबान होती है(अशोक मिज़ाज की ग़ज़लें)तथा बिहार के प्रतिनिधि ग़ज़लकार का सम्पादन ।
देश के तमाम स्तरीय पत्र/पत्रिकाओं में निरंतर ग़ज़लों और आलेखों का प्रकाशन
सम्मान  
बिहार उर्दू अकादेमी,राजभाषा,विद्यावाचस्पति,नई धारा का रचना सम्मान,आचार्य लक्ष्मीकान्त मिश्र स्मृति सम्मान के अतिरिक्त दर्जनों साहित्यिक संस्थाओं द्वारा सम्मानित
सदस्य-बिहार फिल्म विकास एवं वित्त निगम
संप्रति –स्वतंत्र लेखन
संपर्क- गुलज़ार पोखर,मुंगेर (बिहार )811201
Email-anirudhsinhamunger@gmail.com
Mobile-09430450098  

             

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