प्रख्यात कथाकार असग़र वजाहत साहब जिस तरह किसी परिचय के मुँहताज नहीं हैं वैसे ही उनकी रचना। गंभीर से गंभीर मुद्दे को भी सहजता से रूपरेखा में ढ़ाल लेते हैं। वजाहत साहब न सिर्फ अपने चारों ओर की हवा से वाकिफ रहते हैं बल्कि समय समय पर वे इस पर अपनी राय भी रखते हैं। प्रस्तुत कहानी भले ही व्यंग्य के रूप में है लेकिन पढ़ते ही आपको मालूम पड़ जाएगा कि निशाना कहाँ साधा गया है। तो आइये पढ़ते हैं असग़र वजाहत साहब की कहानी "नये ईसा मसीह"
नये ईसा मसीह
(कहानी)
(कहानी)
असग़र वजाहत
(हिंदी के वरिष्ठ और प्रतिष्ठित कवि, व्यंगकार और पत्रकार विष्णु नागर जी को समर्पित)
एक नए ईसा मसीह हैं। उन से सभी खुश हैं । उनकी लोकप्रियता आसमान को छू रही है। हर आदमी उनके ऊपर बलिदान होने को तैयार है। वे जहां जाते हैं लोग अपनी आंखें बिछा देते हैं।
इसी समय कोइ और आया। उसने कहा कि वह ईसा मसीह है । अब ईसा मसीह दो हो गए। एक को हम कह सकते हैं नये ईसा मसीह और दूसरे को कह सकते हैं पुराने ईसा मसीह।
इसी समय कोइ और आया। उसने कहा कि वह ईसा मसीह है । अब ईसा मसीह दो हो गए। एक को हम कह सकते हैं नये ईसा मसीह और दूसरे को कह सकते हैं पुराने ईसा मसीह।
नये ईसा मसीह को जब यह पता चला कि कोई और भी अपने आपको ईसा मसीह कह रहा है तो वे गुस्से से पागल हो गये। उन्होने कहा , किसकी हिम्मत है कि कोई और अपने को ईसा मसीह कह सके। मैं देख लूंगा ।मैं समझ लूंगा। मैं दिखा दूंगा । मैं कर दूंगा ।मैं फोड़ दूंगा ।मैं तोड़ दूंगा । मैं चीर दूंगा। मैं फाड़ दूंगा। मैं बजा दूंगा।मैं घटा दूंगा। मैं मिटा दूंगा।मैं घुसेड़ दूंगा। .... मैं ईसा मसीह था, हूँ और रहूँगा।
पुराने ईसा मसीह को जब ये पता चला कि कोई उनसे खुश नहीं है तो पुराने ईसा मसीह नए मसीह के सामने आए और अपना एक गाल उनके आगे कर दिया। नये मसीह ने उनके गाल पर एक जोर का थप्पड़ मारा। पुराने मसीह ने दूसरा गाल आगे कर दिया ।नए मसीह ने उस पर भी जोर का तमाचा मारा। पुराने मसीह ने फिर पहला गाल आगे कर दिया । पुराने मसीह को नये मसीह लगातार तमाचे मारते रहे। यहां तक कि पुराने मसीह अधमरे हो गए।
और फिर नये मसीह ने पुराने ईसा मसीह को सूली पर टांग दिया गया।
जनता ने करतल ध्वनि से नए ईसा मसीह का समर्थन किया।
लाखों लोगों की भीड़ को नए ईसा मसीह ने संबोधित किया है।
- असली ईसा मसीह कौन है? आप लोग बताओ? मैं हूं या यह आदमी है जो सूली पर चढ़ा है?
- आप हैं आप हैं।' जनता एक स्वर में बोली।
- सच्चा कौन है, मैं हूँ या यह आदमी है जो सूली पर चढ़ा है ?
- आप हैं आप हैं ।
- तुम किसके आदेश मानोगे, मेरे यह इस आदमी के जो सूली पर चढ़ा है ?
- आपके आपके।' पूरी जनता ने कहा ।
- तुम मुझे वोट दोगे या इस आदमी को जो सूली पर चढ़ा है?
- आपको आपको।'
- किस पर विश्वास करते हो जो सूली पर चढ़ा है या मुझ पर ?
- आप पर और आप पर और आप पर ।' जनता ने एक स्वर से कहा।
और फिर नये मसीह ने पुराने ईसा मसीह को सूली पर टांग दिया गया।
जनता ने करतल ध्वनि से नए ईसा मसीह का समर्थन किया।
लाखों लोगों की भीड़ को नए ईसा मसीह ने संबोधित किया है।
- असली ईसा मसीह कौन है? आप लोग बताओ? मैं हूं या यह आदमी है जो सूली पर चढ़ा है?
- आप हैं आप हैं।' जनता एक स्वर में बोली।
- सच्चा कौन है, मैं हूँ या यह आदमी है जो सूली पर चढ़ा है ?
- आप हैं आप हैं ।
- तुम किसके आदेश मानोगे, मेरे यह इस आदमी के जो सूली पर चढ़ा है ?
- आपके आपके।' पूरी जनता ने कहा ।
- तुम मुझे वोट दोगे या इस आदमी को जो सूली पर चढ़ा है?
- आपको आपको।'
- किस पर विश्वास करते हो जो सूली पर चढ़ा है या मुझ पर ?
- आप पर और आप पर और आप पर ।' जनता ने एक स्वर से कहा।
सूली पर लटके यीशु मसीह की आंखें धीरे धीरे बंद हो रही थीं । लोग यह समझे कि उनकी आँखें वास्तव में 'बंद' हो जायेगीं।
पर पुराने ईसा मसीह की आँखें कभी 'बंद' नहीं होतीं।
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पर पुराने ईसा मसीह की आँखें कभी 'बंद' नहीं होतीं।
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असग़र वजाहत के वॉल से साभार।
