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सोमवार, 3 अप्रैल 2017

अविनाश दास ने दिया अनारकली ऑफ आरा के सहयोगियों को धन्यवाद

पत्रकार से फिल्मकार बने अविनाश दास अपनी फिल्म "अनारकली ऑफ आरा" के आने और उसके प्रदर्शन के बाद आज अपने फेसबुक वॉल से फिल्म से जुड़े हर कलाकार को धन्यवाद दे रहे हैं। जितनी अच्छी फिल्म थी उतने ही अच्छे इंसान हैं अविनाश भाई। एक औपचारिक धन्यवाद देकर अविनाश भाई ने बता दिया कि हम मिट्टी के लोग मिट्टी से जुड़े रहना जानते हैं। हम न सफलता पाकर अहम् में डूब जाते हैं न ही असफलता पर रूक जाते हैं बल्कि अपने कर्मों का ईमानदारी पूर्वक वहन करते हुए आगे बढ़ते रहते हैं। अविनाश भाई जीवन में हमेशा सफल होते रहें, एक से बढ़कर एक अच्छी फिल्मों को करते हुए अपना और बिहार का नाम रौशन करते रहें । इन्हीं शुभकामनाओं के साथ पढ़ते हैं उनके शब्दों को।


फिल्म आयी, गयी। बातें हैं, बातें रहेंगी। हमारी तरफ किसी भी आयोजन की शुरुआत मंगलाचरण (Invocation) से होती है और समापन समदाउन (Thanksgiving Song) से होता है।


मैं सबसे पहले स्वरा [Swara Bhasker] का शुक्रिया करता हूं, जो अनारकली को कंसीव करने से लेकर स्क्रिप्ट और बाद की पूरी प्रक्रिया में पूरी तरह इनवाॅल्व रही। काफी ख़ून जलाया और कई बार ज़ख़्मी हुई, बीमार पड़ी।

डायरेक्टर आॅफ फोटोग्राफ़ी अरविंद कन्नाबिरन [Arvind Kannabiran] नहीं होते, तो शायद मैं बहुत असहाय होता। उन्होंने हमेशा मेरा उत्साह बनाये रखा, ढाढ़स देते रहे। सेट पर तमाम प्रतिकूल परिस्थितियों के बाद भी मेरे प्रति अपने सम्मान और विश्वास में उन्होंने कोई कमी नहीं आने दी।

एडिटर जबीन मर्चेंट [Jabeen Merchant], जिन्होंने अनारकली को टेबल पर लगभग री-राइट किया। मेरी हर बात को धैर्यपूर्वक सुना और फिल्म की मूल भावना को लेकर स्क्रिप्टिंग के समय से बहुत उत्साहित रहीं।

संगीतकार रोहित शर्मा [Rohit Sharma] इस फिल्म की रीढ़ रहे। बिहार की आत्मा उन्होंने अनारकली के संगीत में उकेरने की कोशिश की और सफल रहे। रोहित जी के बिना अनारकली की कल्पना भी नहीं की जा सकती थी।

असोसिएट डायरेक्टर रवींद्र रंधावा [Ravinder Randhawa] पूरी ख़ामोशी से मेरे हिस्से का विष पीते रहे और पूरी समझदारी से इस फिल्म को बेहतर और बेहतर बनाने में लगे रहे। ख़ास बात ये कि जिस क्लाइमेक्स की चर्चा हो रही है, वह गीत उन्होंने लिखा। वरना मेरे पास तो क्रांतिकारी कवि गोरख पांडे के गीत "गुलमिया अब हम नाही बजइबो, अजदिया हमरा के भावेले" का रेफरेंस था!

प्रोडक्शन डिज़ायनर अश्विनी श्रीवास्तव [Ashwini Shrivastav] ने कम संसाधनों के बावजूद अनारकली की दुनिया को रीयल बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ी।

एक नाम, जिसका ज़िक्र करना लाज़िमी है, वह नाम है तुषार सेठ [Tushar Seth] का। वह हमारे फर्स्ट एडी थे। तुषार ने टाइट टाइम-लाइन का हमेशा सबसे ज़्यादा ख़याल रखा। प्रोड्यूसर के दिये गये समय के भीतर हम तुषार की वजह से ही फिल्म बना पाये।

काॅस्ट्यूम डिज़ायनर रूपा चौरसिया [Rupa Chourasia] का डंका तो बज ही रहा है। तो हम भी उनकी जय जय कर लेते हैं।

बाक़ी हमारे कास्टिंग डायरेक्टर जीतेंद्र नाथ जीतू [Jitendra Nath Jeetu], असिस्टेंट डायरेक्टर्स निधि [Pandey Nidhi Singh], अमित [Amit Mishra] और मुहित [Muhitt Agarwaal] ने जो दिन-रात एक किया था, उसे शुक्रिया जैसे औपचारिक शब्दों से नहीं निपटाया जा सकता। पार्टी होगी दोस्तों और ज़रूर होगी।

आख़िर में निर्माता संदीप कपूर [Sandiip Kapur] का धन्यवाद, जिनके बिना अनारकली सिनेमा के पर्दे पर कभी नहीं आ पाती। आज भी परदे के पीछे के सामाजिक अंधेरे में टाॅर्च की रोशनी पर नाचती रहती और सारा दुख अकेली झेलती रहती।

#AnaarkaliOfAarah