शनिवार, 26 नवंबर 2022

अंतरराष्ट्रीय फिल्म फेस्टिवल, गोवा में बिहार की उपस्थिति पर विनोद अनुपम का विचार

 खुशी की बात है कि अंतरराष्ट्रीय फिल्म फेस्टिवल, गोवा में इस वर्ष बिहार का भी पेवेलियन देखा गया। पेवेलियन का उद्घाटन Pankaj Tripathi ने किया।इस पेवेलियन के साथ बिहार को शोकेस करने पहुंचे अधिकारियों और मंत्री के फिल्मकारों और अभिनेताओं के साथ मुलाकातें बैठकों की तस्वीरें भी दिखी। वास्तव में ऐसी कोशिशें कोई पहली नहीं थी।2015 में भी प्रधान सचिव Vivek Singhके नेतृत्व में कला संस्कृति विभाग के एक दल ने इफ्फी में शिरकत किया था,यह भागीदारी मूलतः पटना फिल्म महोत्सव की तैयारी के सिलसिले में थी ।जब  Ganga Kumar  फिल्म निगम के प्रबंध निदेशक थे,तब भी इफ्फी से पेवेलियन के लिए आमंत्रण आया था, लेकिन सवाल उठा कि लेकर क्या जायें, फिल्म पालिसी ही नहीं बन सकी है। कमाल यह कि पालिसी आज भी नहीं बनी है, फिर इस वर्ष पेवेलियन में हमने क्या बातें रखीं?और जो रखीं, क्या बगैर पालिसी के उसका कोई महत्व है?

बिहार के फिल्म पालिसी की भी अलग ही कथा है।यदि यह कभी लागू हो भी गई तो शायद सबसे लंबे समय में तैयार होने वाली पालिसी के रूप में इसका नाम गिनीज बुक में जा सकता है।इस पालिसी पर फिल्मकारों से राय के लिए तो तीन बार मुंबई में बैठकें हुई।एक बैठक में तो मंत्री शिवचंद्र राम और तत्कालीन विकास आयुक्त Shishir Sinha भी शामिल रहे। 

सवाल है क्या वाकई बिहार सरकार की प्राथमिकता में कहीं सिनेमा है, नहीं तो फिर बेवजह की मशक्कत क्यों।यह इससे भी समझ सकते हैं इस वर्ष इफ्फी के दौरान बिहार पेवेलियन में बैठे किसी मंत्री और अधिकारी ने उस फिल्म को ,और उसके फिल्मकार को याद करने की जहमत भी नहीं उठाई जो इंडियन पनोरमा में मैथिली फ़िल्म #LotusBloom के रुप में बिहार की एकमात्र भागीदारी थी,जबकि कुछ ही कदमों पर उसका प्रदर्शन भी चल रहा था।फिल्म के एक अभिनेता Akhilendra Mishra से रहा नहीं गया,तो बिना बुलाए उन्होंने अपनी उपस्थिति दर्ज की, लेकिन किसी मंत्री या अधिकारी से उनकी मुलाकात नहीं हो सकी।कैसे सरकार से हौसले की उम्मीद रखें बिहार के फिल्मकार...





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