सोमवार, 3 अप्रैल 2017

राधेश्याम तिवारी एवं अन्य का पटना में कविता-पाठ (रपट): शहंशाह आलम

राधेश्याम तिवारी एवं अन्य का पटना में कविता-पाठ
शहंशाह आलम
       

     कवयित्री डॉ. भावना शेखर के आवास सी-43, अमरावती अपार्टमेंट, बेली रोड, पटना में 'सृजन संगति' के तत्वावधान में दिल्ली से पधारे कवि राधेश्याम तिवारी का एकल-पाठ तथा पटना के अन्य प्रतिनिधि कवियों के कविता-पाठ का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के मुख्य-अतिथि डॉ. शिवनारायण थे, अध्यक्ष डॉ. श्रीराम तिवारी थे। संचालन ऋषीकेश पाठक ने किया। आतिथ्य डॉ. भावना शेखर जी ने संभाला।


     इस अवसर पर दिल्ली से पधारे चर्चित कवि राधेश्याम तिवारी ने अपनी - भाषा में संभव, बिल्ला नम्बर-56, हुसैन जी को नहीं जाना था 'कतर', राजेन्द्र यादव की कुर्सी, छाता, कनस्तर में गंगा, राजघाट में गोडसे, हम लड़ेंगे, दिल्ली में सियार, दिल्ली : उजड़े हुए लोगों का घर, कुत्ते की प्रार्थना, पूँजी का नंगा नाच, तुम कहाँ खड़े हो, तुम्हारे बोलने का मतलब, लोकतंत्र की ऐसी माया, समय के साथ, मुर्दा लोग, नयी सुबह के स्वागत में, फिर किसी ने छेड़ दिया - आदि कविताओं का पाठ किया। राधेश्याम तिवारी जी की कविताओं ने अपने पाठ किए जाने के समय पूरी सहजता से अपनी ताज़गी को बरक़रार रखा और आदमी के कठिन समय को बेहद बारीकी से प्रकट किया। उनकी कविताओं की ख़ासियत यही कि उनकी कविताएँ जितनी सहज दिखाई देती हैं, कविताओं का असर उतना ही गहरा होता है। राधेश्याम जी की कविताएँ समकालीन कविता की दुनिया में लम्बे अरसे तक टिके रहने वाली कविताएँ हैं।


     कार्यक्रम के दूसरे सत्र में श्रीराम तिवारी, शिवनारायण, भावना शेखर, रानी श्रीवास्तव, शहंशाह आलम, भागवत शरण झा 'अनिमेष', हरींद्र विद्यार्थी, निविड़ शिवपुत्र, ऋषीकेश पाठक, विजय गुँजन, सुजीत वर्मा, रमेश पाठक, राजकुमार प्रेमी, रवीन्द्र कुमार सिन्हा, हृदय नारायण झा, सरोज तिवारी, बाँके बिहारी आदि कवियों / कवयित्रियों ने अपनी-अपनी प्रतिनिघि कविताओं का पाठ किया।

     आए हुए कवियों, कवयित्रियों, श्रोताओं का आभार निविड़ शिवपुत्र ने व्यक्त किया।

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