सोमवार, 3 अप्रैल 2017

अनिरूद्ध सिंहा की गजलें

                     
       
ग़ज़ल
                     अनिरुद्ध सिन्हा

पाले हुए  जो ज़ख्म  जुबां  पर उतर गए
रिश्ते तमाम  कट  गए  जज़्बात मर गए

घर की  तलाश और  मुहब्बत की चाह में
निकले  हुए वे लोग  न जाने  किधर गए

ये और  बात है  कि हमें  कुछ नहीं मिला
जब ज़िन्दगी की खोज में हम चाँद पर गए

साये की  तरह रहते थे जो साथ –साथ वो
रस्ते में अब मिले भी तो बचकर गुज़र गए

खुशबू तुम्हारे जिस्म की ये काम कर  गई
काँटों पे  चल रहे  थे अचानक  ठहर गए

                   💐💐💐💐💐


फूल बनकर जो ख़्वाब आता है
बारहा    लाजवाब   आता  है

जब मुहब्बत से लोग मिलते हैं
तब  वहाँ  इन्क़लाब  आता है

फिर भी रौशन जहां नहीं होता
रोज़  ही  आफताब  आता  है

अब कहाँ प्यार के लिफाफे में
कोई  लेकर  गुलाब  आता है

शायरी  में मज़ा  तभी आता
शेर जब  कामयाब  आता है


💐💐💐💐💐


कोई किसी की तरफ है कोई किसी की तरफ
वो एक हम हैं जो रहते हैं ज़िन्दगी की तरफ

जरूर  उससे  कोई दिल  का  मामला होगा
हमारी सोच भटकती है क्यों उसी  की तरफ

ग़मों ने  इतनी  मुहब्बत से हमको पाला है
कदम उठे न हमारे  कभी  खुशी की तरफ

वफ़ा  का  साज  उठाए  हुए न जाने क्यों
मैं चल रहा हूँ  अँधेरी तेरी  गली की तरफ

भटक न जाए वो  सहरा में दर बदर होकर
बढ़ाए हाथ  समुंदर  रहा  नदी  की  तरफ


💐💐💐💐💐



वो मेरे दिल तलक आता  मगर दाखिल नहीं होता
महज मिलने मिलाने से ही कुछ हासिल नहीं होता

जो हम  फिरकापरस्ती  को मुहब्बत से मिटा देते
कोई बिस्मिल नहीं  होता कोई क़ातिल नहीं  होता

ये कैसी  बेबसी  के दौर  में  अब जी रहे हैं हम
हमारी फिक्र में  शामिल हमारा  दिल नहीं  होता

अगर सीने में जज़्बों की जो लौ मद्ध्म नहीं होती
किसी  को जीत लेना फिर यहाँ मुश्किल नहीं होता

कभी जो  ठान लेता  है बगावत के लिए कुछ भी
तो लेकर हाथ में खंजर  कभी गाफ़िल नहीं  होता

                       💐💐💐💐💐


जब भी उठा  है  दर्द  तेरा  मुस्कुरा लिए
कुछ इस तरह से आँख के मोती बचा लिए

जितने चमन के फूल थे घर में सजा लिए
यारों  ने  खूब  अपने  मुक़द्दर बना  लिए

ज़ख़्मी  हुए हैं  पाँव इन्हें देखना भी क्या
हमने ही  अपनी  राह में काँटे बिछा लिए

इतने  मिले  हैं ज़ख्म  ज़माने  से दोस्तो
रोने  को जी  किया तो ज़रा गुनगुना लिए

पहचान   अपनी  खूब  छुपाई  है आपने
चेहरे  पे अपने  और भी चेहरे लगा लिए

💐💐💐💐💐

                                                                                                               गुलज़ार  पोखर,मुंगेर(बिहार)811201
 Email-anirudhsinhamunger@gmail.
 Mobile-09430450098        

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