भागमभाग की इस जिंदगी में चारों ओर सिर्फ शोर ही शोर सुनाई पड़ती है. शोर चाहे
वो गुस्से में चिल्लाते इंसान की हो, या फिर अपनी तेज गति से दूरी की जवानी लेती
गाड़ी की. लेकिन हैरत है कि इंसान समस्यओं से जूझने की बजाय उन तेज आवाजों में ही
शांति की तलाश करने लगता है. जबकि वह जितने तेज आवाज का आदि होता जा रहा है वहां
सुनाई नहीं पड़ती है तो खुद की आवाज, अपनों की आवाज, रिश्ते और मानवता की आवाज. और
ऐसे में याद आती है कवि सुशील कुमार की कविता सुनना केवल तुम. आप खुद देखे इस
कविता को.
सुनना केवल तुम
सुनना केवल तुम
वह आवाज़
जो बज रही है
वह आवाज़
जो बज रही है
इस तन-तंबूरे में
स्वाँस के नगाड़े पर
प्रतिपल दिनरात
वहाँ लय भी है,
और ताल भी,..तो
जरुर वहाँ नृत्य भी
होगा और दृश्य भी
ओह, कितना शोर है
सब-ओर
कितने कनफोड़ स्वर हैं
आवाज़ की इस दुनिया में
और कितनी बेआवाज़
हो रही है
अपनी ही आवाज़ यहाँ !
कहीं चीखें सुन रहा हूँ,
कहीं क्रंदन
मशीनों के बीच घूमता हुआ
खुद एक मशीन हो गया हूँ
भीड़ का तमाशाई बन रहा कहीं
तो कभी तमाशबीन हो गया हूँ !
कम करो कोई बाहर की
इन कर्कश-बेसूरी आवाज़ों को...
लौट आने दो मुझे अपने घर
सुनने दो आज
वह अनहद नाद
जन्म से ही मेरे भीतर
जो बज रहा है
मेरे सुने जाने की प्रतीक्षा में
उसकी लय और ताल पर
मुझे झूमने दो
मुझे थोड़ी देर यूँ ही
स्वाँस के नगाड़े पर
प्रतिपल दिनरात
वहाँ लय भी है,
और ताल भी,..तो
जरुर वहाँ नृत्य भी
होगा और दृश्य भी
ओह, कितना शोर है
सब-ओर
कितने कनफोड़ स्वर हैं
आवाज़ की इस दुनिया में
और कितनी बेआवाज़
हो रही है
अपनी ही आवाज़ यहाँ !
कहीं चीखें सुन रहा हूँ,
कहीं क्रंदन
मशीनों के बीच घूमता हुआ
खुद एक मशीन हो गया हूँ
भीड़ का तमाशाई बन रहा कहीं
तो कभी तमाशबीन हो गया हूँ !
कम करो कोई बाहर की
इन कर्कश-बेसूरी आवाज़ों को...
लौट आने दो मुझे अपने घर
सुनने दो आज
वह अनहद नाद
जन्म से ही मेरे भीतर
जो बज रहा है
मेरे सुने जाने की प्रतीक्षा में
उसकी लय और ताल पर
मुझे झूमने दो
मुझे थोड़ी देर यूँ ही
स्वांस-हिंडोला में
झूलने दो।
झूलने दो।
संपर्क :-
सुशील कुमार
हंस निवास / कालीमंडा
पुराना दुमका / दुमका / झारखंड – 814101
फोन न / मो. न. .
– 0657 2650744 / 09431310216 /
09006740311

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