शुक्रवार, 16 दिसंबर 2022

जबरन की शराबबंदी सफलता का मानक नहीं

 कुछ वर्ष पहले भी खाने -पीने के मसले पर विवाद हुआ था। उस समय कहा गया था कि खाना-पीना व्यक्तिगत मसला है इस पर किसी तरह का पाबंदी उचित नहीं। फिर शराबबंदी पर ये हंगामा क्यों? जब सम्पूर्ण बिहार में हर चौक-चौराहे पर शराब बिक रहा था तब भी वे ही लोग उन दूकानों पर लाइन लगते थे जो पीते थे। आज जब शराबबंदी लागू है तब भी वे ही लोग पी रहे हैं जो इसके आदि हैं। समझ से परे है कि श्रीमान इसे किस जिद्द में लिये बैठे हैं। खबर पढ़ने को मिली कि मुख्यमंत्री महोदय पिछले दिनों भी अपने विधायकों से बात की कि शराबबंदी लागू रखा जाय या हटा दिया जाय? अब सोचने वाली बात है कि किस पियाक विधायक में इतनी हिम्मत होगी कि अपने मुख्यमंत्री के संकल्प के विरोध में जाय? लेकिन गाहे -बगाहे अनेक मौकों पर अनेक विधायक / नेता शराबबंदी को समाप्त करने की सलाह मौखिक रूप से विभिन्न माध्यम से दें चुके हैं। 




आज उड़ती खबर मिल रही है कि सदन में मुख्यमंत्री ने कहा है कि शराब पीकर मरने वालों को एक रूपया भी नहीं दिया जाएगा। जबकि पिछले दिनों का बयान था कि जो पीयेगा वो मरेगा ही।

ऐसी परिस्थिति में उचित यही जान पड़ता है कि मुख्यमंत्री महोदय को किसी मध्यमार्ग पर जरूर विचार करना चाहिए। क्योंकि बालू और दारू ही बिहार के लिए एक नासूर बनता जा रहा है। और कोई तो वजह होगी कि वर्षों से शराबबंदी कानून लागू होने के बाबजूद लोग पी रहे हैं और मर रहे हैं। सरकार को यह भी अध्ययन करवाना चाहिए कि अन्य राज्यों की क्या स्थिति है? वहां शराबबंदी का कौन -सा माडल कार्य कर रहा है जो वहां से शराबबंदी की वजह से मौत की खबरें सुनाई नहीं पड़ती है?

नशा या सामाजिक बुराईयों से दूर रहने की सलाह/ जीवनशैली अच्छी बात है लेकिन महज एक नशा की वजह से अकाल मृत्यु को प्राप्त होना भी सभ्य समाज के लिए उचित नहीं माना जा सकता। फिर खाने-पीने का मसला लोगों की निजी जिंदगी का हिस्सा है उसमें किसी तरह का दखल उचित नहीं। और सच पूछा जाय तो जबरन की शराब बंदी सफलता का कोई मानक नहीं हो सकता। सफलता तब मानी जाएगी जब शराब चुनिंदा जगहों पर उपलब्ध हो, बाबजूद इसके युवा/जनता उस पेय से नफ़रत करे। उपलब्धता के बाबजूद पीने वालों की संख्या/ प्रतिशत दिन-प्रतिदिन कम होता जाय।

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गौरतलब है कि व्यक्तिगत रूप से न तो मैं किसी भी प्रकार के नशा का आदि हूं न ही समर्थक हूं। हां, चाय पीने का आदि हूं लेकिन आशा करता हूं कि चाय पीने पर सरकार कोई पाबंदी नहीं लगाएगी।

-सुशील कुमार भारद्वाज


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