रवीश कुमार एक पलायनवादी व्यक्ति: सुशील कुमार भारद्वाज
मेरी बात कुछ लोगों को बुरी लग सकती है लेकिन सच्चाई से आप भाग नहीं सकते। जब से #रवीशकुमार ने #एनडीटीवी छोड़ी, तब से उनके पक्ष में लिखने-बोलने वाले बढ़-चढ़ कर पोस्ट पर पोस्ट किये जा रहे हैं। लेकिन मेरी समझ से मैग्सेसे पुरस्कार से सम्मानित पत्रकार रवीश कुमार एक पलायनवादी व्यक्ति हैं। जब तक एनडीटीवी के मालिक राय दम्पत्ति रहे तब तक निष्पक्ष पत्रकारिता का राग अलापते रहे और उनके इस्तीफा के अगले दिन कुमार साहब ने इस्तीफा दे दिया। आखिर क्यों? क्या यह मान लिया जाय कि आपके तथाकथित निष्पक्ष पत्रकारिता का रहस्य राय दम्पत्ति ही थे? आप उनके द्वारा इस्तेमाल किए जा रहे थे?
राय दम्पत्ति को भी चैनल की जिम्मेदारी की पेशकश की गई थी लेकिन संभव है कि चैनल को जिस प्रक्रिया के तहत बेचा गया उसमें उनसे कोई राय नहीं ली गई थी इसलिए वे आहत हों, और चैनल से उन्होंने खुद को अलग कर लिया।
अब बात आती है रवीश बाबू की। वे चैनल के मालिक नहीं बल्कि महज एक कर्मचारी के रूप में कार्य कर रहे थे। उनकी रोजी रोटी का सवाल वहां से जुड़ा हुआ था। उन्हें नये मालिक ने न तो पद छोड़ने को कहा न ही उनके कार्यशैली पर प्रश्न चिह्न लगाया, फिर क्यों भयाक्रांत होकर समय से पहले ही निकल लिये? ये तो हो गया कि पानी में डूब जाने के डर से तैरने की कोशिश ही नहीं करना। आप चैनल में बने रहते जब तक की चैनल आपको हटने को नहीं कहता या फिर जब तक की आपकी रपट या बहस पर रोक नहीं लगाई जाती। यदि नया चैनल मालिक आर्थिक, मानसिक या किसी भी रूप में आपके समक्ष व्यवधान उत्पन्न करता, आप आवाज उठाते तो जनता आपके साथ खड़ी नजर आती। आपकी समस्या लोगों को समझ में आती। लेकिन आप तो निहायत ही कमजोर और डरपोक, पलायनवादी नायक साबित हुए। आप सरकार के फ़ैसलों पर सवाल उठाकर नायक बन सकते हैं जैसे कि विपक्ष का एक मात्र चेहरा आप ही हों, लेकिन चैनल मालिक से आप एक सवाल पूछने की भी हिम्मत नहीं रखते हैं? सारी क्रांति समाप्त? अभिव्यक्ति की आजादी समाप्त? नहीं रवीश बाबू नहीं। कम से कम आपसे ऐसे पलायनवादी कदम की उम्मीद तो कतई नहीं थी। आपसे पहले भी दर्जनों पत्रकारों ने चैनल और अखबार छोड़ें। स्वतंत्र पत्रकारिता की। दूसरे जगह नौकरी की। अपना स्वतंत्र चैनल, अखबार या यूट्यूब चैनल शुरू किया। लेकिन सबकुछ बहुत ही शांति से। लेकिन आपने तो ढ़ोल पीट-पीट कर सबकुछ किया। भले ही आपके भक्त आपको इतिहास में दर्ज करने की बात कर रहे हों लेकिन आप एक पलायनवादी के रूप में ही याद किये जाएंगे जिसने भविष्य के डर से ही सबकुछ छोड़ दिया।
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