पटना विश्वविद्यालय के हिन्दी विभाग में आयोजित कार्यक्रम में बोलते हुए बिहार के प्रख्यात साहित्यकार/ कवि अरूण कमल।
पटना विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग में गुरूवार को हिंदी कविता के लिए साहित्य अकादमी से सम्मानित बिहार के पहले हिंदी कवि अरुण कमल के काव्य-पाठ के साथ उनसे संवाद का कार्यक्रम आयोजित किया गया ।
कार्यक्रम की शुरुआत में विभाग के वरिष्ठ अध्यापक डॉ. दिलीप राम ने अंग वस्त्रम और पुष्प-गुच्छ देकर अरुण कमल का सम्मान किया और उनकी कविताओं पर आलोचनात्मक टिप्पणी भी की।
हिंदी विभाग के अध्यक्ष प्रो. तरुण कुमार ने स्वागत संभाषण में अरुण कमल की कविता को साधारणता का उत्सव मनाने वाली कविता बताते हुए उनकी कुछ पसंदीदा कविताओं का पाठ भी किया।
विभाग के विद्यार्थियों में समीर ने अरुण की कमल की 'धार' शीर्षक कविता, नंदिनी ने 'मुक्ति' , पूजा ने 'घोषणा', रूपम ने 'बुढ़ापा' , गौरव ने 'उत्तम', आफ़ताब ने 'उधर के चोर', संतोष ने 'सूचकांक', वसुधा ने 'पूंजी', नेहा ने 'निगेटिव फोटो' का पाठ किया।
अंत में कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए अरुण कमल ने कहा कि दुनिया का सारा साहित्य एक ही है भले ही वह अलग-अलग भाषाओं में लिखा जाता है।
पटना विश्वविद्यालय में अंग्रेजी के प्रोफेसर रहे अरुण जी ने कहा कि हिंदी विभाग, पटना विश्वविद्यालय ने मुझे साहित्यिक रूप से पोषित किया। इस क्रम में उन्होंने पंडित रामावतार शर्मा, केसरी कुमार, देवेंद्रनाथ शर्मा, नंदकिशोर नवल, रामवचन राय इत्यादि विद्वानों को याद किया।
उन्होंने एक कवि के तौर पर एक ऐसे समाज की रुपरेखा रखी जिसमें सबसे कमजोर व्यक्ति भी सुरक्षित रह सके। किसी तरह की गैर बराबरी न हो। उन्होंने हिंदी के विद्यार्थियों को खास तौर पर संस्कृत, उर्दू और अंग्रेजी के साहित्य को पढ़ने का सुझाव दिया l
बाद में श्रोताओं के सवालों का जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि कविता में गुटबंदी जैसी कोई चीज नहीं होती है। कविता में सब अपनी दौड़ दौड़ते हैं। इसमें कोई हार-जीत नहीं होती।
धर्म से संवाद सम्बंधित एक अन्य सवाल सम्बन्ध में उनका कहना था कि असल सवाल मनुष्यता का है, धर्म का नहीं। इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता कि कोई धर्म मानता है या नहीं।
उन्होंने स्त्री लेखिकाओं और युवा कवियों की नयी पीढ़ी की तारीफ करते हुए कहा कि इतने सम्भावनाशील पीढ़ी हिंदी के साहित्यिक परिदृश्य में नयी घटना है।
उन्होंने कार्यक्रम के अंत में अपनी कविता 'घोषणा', 'योगफल', 'मेख', 'कॉलेज का अंतिम दिन' का पाठ किया। कविता पाठ करते-करते वे भावुक भी हो गए।
इस अवसर पर हिंदी विभाग,पटना कॉलेज के अध्यक्ष डॉ. मार्तण्ड प्रगल्भ, डॉ. कंचन कुमारी, डॉ. राकेश शर्मा, डॉ. जैनेन्द्र कुमार, डॉ. सूर्यनाथ सिंह, डॉ. पीयूष राज, डॉ. सुधांशु सहित विभाग के शोधार्थी और विद्यार्थी उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का संचालन डॉ. सितारे हिन्द ने और धन्यवाद ज्ञापन डॉ. रेणु चौधरी ने किया l

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