गुरुवार, 30 मार्च 2017

पटना में मदन कश्यप का कविता-पाठ

29 मार्च 2017 को बिहार की धरती पटना में महाराजा कामेश्वर सिंह कॉम्प्लेक्स स्थित टेक्नो हेराल्ड के परिसर में प्रगतिशील लेखक संघ के पटना जिला ईकाई के तत्वावधान में वरिष्ठ कवि मदन कश्यप के सम्मान में एक काव्यात्मक कार्यक्रम का आयोजन किया गया।'गूलर के फूल नहीं खिलते', 'लेकिन उदास है पृथ्वी', नीम रोशनी में', 'कुरुज' और 'दूर तक चुप्पी' जैसे महत्वपूर्ण कविता-संग्रहों के कवि मदन कश्यप ने प्रतिरोध की आग में तपी -तपायी 'भारत माता की जै', 'डपोरशंख', 'छोटे-छोटे ईश्वर', 'पुरखों का दुःख', 'अभी भी बचे हैं', 'उम्मीद', 'बहुरूपिया', 'काल-यात्री' और 'बिजूका' शीर्षक जैसी कविताओं का पाठ किया। राजभाषा विभाग, बिहार सरकार के 'नागार्जुन-सम्मान' से सम्मानित  कवि मदन कश्यप के कविता-पाठ आयोजन के मुख्य अतिथि दिल्ली से पधारे प्रसिद्ध कवि गंगेश गुँजन थे, अतिथि दिल्ली से पधारे कवि-आलोचक देवशंकर नवीन थे। अध्यक्षता समकालीन कविता के महत्वपूर्ण कवि प्रभात सरसिज ने की। कार्यक्रम का संचालन कवि राजकिशोर राजन किया और धन्यवादज्ञापन कवि शहंशाह आलम ने किया।

पहले सत्र में  मदन कश्यप का कविता- पाठ हुआ तो दूसरे सत्र में आयोजन में शरीक हुए कवि एवं गजलकारों ने अपनी रचना से सबों को बाँधे रखा। जहाँ कुछ वक्ताओं ने मदन कश्यप एवं अन्य रचनाकारों की काव्य-पाठ पर सार्थक टिप्पणी की वहीं कथाकार शेखर ने आयोजन को ऐतिहासिक बताते हुए प्रगतिशील लेखक संघ के ऐतिहासिक पहलुओं पर अपनी बेबाक टिप्पणी रखी। आयोजन की खासियत रही कि मदन कश्यप अपनी कविता -पाठ के साथ -साथ उसकी रचना प्रक्रिया पर भी बात करते रहे। इस मौके पर अनिल विभाकर, संजय कुमार कुंदन, रामनाथ शोधार्थी, कथाकार अशोक, भगवत झा अनिमेष, बी एन विश्वकर्मा, समीर परिमल, सुशील कुमार भारद्वाज आदि समेत कई साहित्यकार उपस्थित रहे।

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