साहित्य की विभिन्न विधाओं में गजल का अपना एक महत्वपूर्ण स्थान है जो न सिर्फ़ अपने शब्दों के रचाव-कसाव से सबको सम्मोहित करने में सफल होता है बल्कि बहुत ही तेजी से लोगों के जुबां पर भी चढ जाता है। आज आनंद लेते हैं गजलगो अनिरूद्ध सिंहा की पांच गजलों का।
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| अनिरूद्ध सिंहा |
1.
रख रही ज़ख़्मों पे अपनी उँगलियाँ पागल हवा
खोल देगी दर्द की सब खिड़कियाँ पागल हवा
ले गई है बादलों तक गर्म रातों की सनक
अब गिराएगी मकां पर बिजलियाँ पागल हवा
बस जरा उनके दिलों से दूर क्या हम हो गए
है बढ़ाने पर अमादा दूरियाँ पागल हवा
आंधियों की बात तुमसे क्या करें हम दोस्तो
जब उड़ाकर ले गई सब तितलियाँ पागल हवा
हर दफ़ा तूफान में वो बादलों की आड़ में
साहिलों से दूर करती कश्तियां पागल हवा
2.
अपना किसी भी और से लहजा नहीं मिला
जीने का ढंग और सलीका नहीं मिला
जुगनू तमाम रात चमकते रहे वहाँ
लेकिन सफ़र में एक भी साया नहीं मिला
सहरा में अपनी प्यास को देता रहा फ़रेब
पानी भरा हो जिसमें वो दरिया नहीं मिला
पहले तो मेरी बात पे आई हया उन्हें
फिर मुझको बात करने का मौका नहीं मिला
खुश हैं पड़ोसवाले भी इस बात पर बहुत
मुझको मेरे नसीब से ज्यादा नहीं मिला
3.
हवा में पाँव होठों पर हँसी है
ये कैसी हुस्न की दीवानगी है
नए वादों के फिर जेवर पहनकर
सियासत मुफ़लिसी में ढल रही है
वहाँ कुछ होंठ भी पत्थर के होंगे
जहां कुछ बेअदब सी ज़िंदगी है
न इतनी तेज़ चल पुरवाइयों में
अभी मौसम में थोड़ी सी नमी है
भला क्यों चाँद के पहलू में तेरे
बदन खामोश कुछ-कुछ बेबसी है
4.
कदमों के जब निशान इरादों में ढल गए
हम हौसलों के साथ हवा में निकल गए
अब भी है अपने नूर पे मगरूर वो बहुत
रस्सी तो जल गई है कहाँ उसके बल गए
प्यासी ज़मीं के जिस्म पे ऐसी बला की धूप
चेहरे थे जिनके चांद सफ़र में बदल गए
फिर मुझको भूलने की भी रस्में अदा हुईं
पहले तमाम ख़त थे जो यादों के जल गए
रक्खे हैं जब से सर पे किसी ने दुआ के हाथ
मुट्ठी में बंद उनके मुकद्दर संभल गए
5.
गरीबी जब कभी हालात से रिश्ता निभाती है
मेरे कच्चे मकानों से कोई आवाज़ आती है
खमोशी छाई रहती है सवालों के उठाने पर
सियासत गुफ़्तगू से हर दफा दामन बचाती है
अदब की तंग चादर ओढ़ लेते ही कोई बेटी
लड़कपन गाँव की गलियों में हँसकर छोड़ जाती है
कलेंडर में शहीदों की जो सूरत देखता हूँ तो
गुलामी की कोई तारीख मेरा दिल दुखती है
मुहब्बत की कलाई को हवस के थाम लेते ही
शराफ़त चीख़ उठती है वफ़ा आँसू बहाती है
संपर्क:-
अनिरूद्ध सिंहा
-गुलज़ार पोखर, मुंगेर (बिहार)811201
मोबाइल-09430450098
Email-anirudhsinhamunger@gmail॰com
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