आज फिर शनिवार आ गया। वह दिन भी शनिवार ही था जब पहली बार बीच शहर में पानी जमा था। नहीं पटना शहर का कुछ हिस्सा एक दिन की बारिश में ही डूब गया था।
साजिश थी या नहीं ये तो कोई नहीं बता सकता क्योंकि बहत्तर घंटा पहले भारी बारिश की संभावना व्यक्त की गई थी और उस पर किसी का नियंत्रण नहीं है। नाले की सफाई आदि की बात बहुत घिसीपिटी है। सरकार की नाकामी की बात करना, किसी निर्लज्ज को महत्त्वपूर्ण बनाना है।
महत्त्वपूर्ण महज इतना है कि नुकसान हुआ जनता का और मालामाल हुई सरकार। जो कष्ट जलकैदी बन लोगों ने भोगे उसके बदले में कोई राहत तो संभव ही नहीं। जिन सामानों का नुकसान हुआ उसका मुआवजा सरकार तो देगी नहीं। लेकिन भिखमंगे की तरह राहत कोष में दान के नाम पर पोस्टर-बैनर पहले जारी कर दिये सरकार ने। साथ-ही-साथ केंद्र सरकार से भी माँगने पहुंच गये। स्वाभाविक ही था कि झोली में कुछ न कुछ आनी ही है।
और सबसे बड़ी बात की राहत कार्य आदि का लेखा-जोखा रखने का रिवाज ही नहीं है। जो है सो घर भरने से ही मतलब है। एक बार लेखा-जोखा भी हुआ तो पटना के डीएम बेचारे गौतम गोस्वामी जी असमय ही जेल में रहते हुए ही दूसरी दुनिया को कूच कर गये।
खैर, अंतिम बात यही कि अमूमन सरकार बाढ़-सुखाड़ का इंतजार ही करती है ताकि घर में हरियाली और चमक-धमक बनी रहे।
★★★★★★★★★★★★★★★★
सुशील कुमार भारद्वाज
साजिश थी या नहीं ये तो कोई नहीं बता सकता क्योंकि बहत्तर घंटा पहले भारी बारिश की संभावना व्यक्त की गई थी और उस पर किसी का नियंत्रण नहीं है। नाले की सफाई आदि की बात बहुत घिसीपिटी है। सरकार की नाकामी की बात करना, किसी निर्लज्ज को महत्त्वपूर्ण बनाना है।
महत्त्वपूर्ण महज इतना है कि नुकसान हुआ जनता का और मालामाल हुई सरकार। जो कष्ट जलकैदी बन लोगों ने भोगे उसके बदले में कोई राहत तो संभव ही नहीं। जिन सामानों का नुकसान हुआ उसका मुआवजा सरकार तो देगी नहीं। लेकिन भिखमंगे की तरह राहत कोष में दान के नाम पर पोस्टर-बैनर पहले जारी कर दिये सरकार ने। साथ-ही-साथ केंद्र सरकार से भी माँगने पहुंच गये। स्वाभाविक ही था कि झोली में कुछ न कुछ आनी ही है।
और सबसे बड़ी बात की राहत कार्य आदि का लेखा-जोखा रखने का रिवाज ही नहीं है। जो है सो घर भरने से ही मतलब है। एक बार लेखा-जोखा भी हुआ तो पटना के डीएम बेचारे गौतम गोस्वामी जी असमय ही जेल में रहते हुए ही दूसरी दुनिया को कूच कर गये।
खैर, अंतिम बात यही कि अमूमन सरकार बाढ़-सुखाड़ का इंतजार ही करती है ताकि घर में हरियाली और चमक-धमक बनी रहे।
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सुशील कुमार भारद्वाज


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