मंगलवार, 16 अक्टूबर 2018

मतलब : सुशील कुमार भारद्वाज

मतलब
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"तुम चादर तान के सो क्यों नहीं जाते?" -उसने अपनी बात बेबाकी से कह दी।
तुरंत तपाक से सामने वाला बोला- "सो जाऊँ?... कैसे सो जाऊँ? किसके लिए सो जाऊँ? कब -कब सो जाऊँ? कहाँ-कहाँ सो जाऊँ?"
"तो ठीक है तुम जिंदगी भर जगे ही रहो। जब, जहाँ ,जैसे इच्छा हो जगे रहो। अपनी आँखों को नींद से दूर ही रखना। देखता हूँ तुम जग कर ही इस भ्रष्ट दुनियां में कब , क्या और कितना कुछ बचा पाते हो? .... और जो कुछ  बचाने में भी सफल हो गए तो देखूँगा कि तुम क्या-क्या अपने साथ ऊपर ले जाओगे?"
"तो तुम्हारे कहने का मतलब है कि ईमानदारी..."
"छोड़ो भी यार! मेरे कहने का कुछ भी मतलब नहीं है। जो बुझाय करो। यहाँ तो हर कोई सिर्फ अपने ही स्वार्थ में डूबा है। यहाँ तो दुनियां का हर इंसान भ्रष्ट है सिवाय खुद को छोड़ के।"
"मेरे कहने का मतलब..."
"अब बस करो। बहुत सुन लिए तुम्हारा मतलब। मतलबी दुनियां में हर किसी का मतलब भी मतलब के अनुसार बदलते और परिभाषित होते रहता है।"
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#सुकुभा

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