कॉलेज ऑफ कॉमर्स आर्ट्स एंड साइंस के सभागार में प्रलेस एवं कॉलेज ऑफ कॉमर्स ऑर्ट्स एंड साइंस के संयुक्त तत्वावधान में शंभु पी सिंह के कथा-संग्रह दलित बाभन का लोकार्पण एवं विचार गोष्ठी आयोजित किया गया।
वरिष्ठ कथाकार श्रीमती मृदुला बिहारी जयपुर से शिरकत करने पधारी थीं।मुख्य अतिथि के रूप में प्रो.डॉ रामवचन राय, विधान पार्षद के साथ शैलेश्वर सती प्रसाद की अध्यक्षता में कार्यक्रम सम्पन्न हुआ।मुख्य वक्ता के रूप में डॉ शिव नारायण, डॉ कासिम खुरशीद, कोलकाता विश्वविद्यालय के प्राध्यापक डॉ अमरनाथ,वरिष्ठ कवि प्रभात सरसिज,वरिष्ठ साहित्यकार श्री राम तिवारी के अतिरिक्त युवा कथाकार सुशील भारद्वाज और युवा कवि राजकिशोर राजन ने भी अपने विचार व्यक्त किया।फतुहा से पधारे लघु कथाकार श्री रामयतन यादव जी ने कहानी के कई पक्षों पर बात की। प्रगतिशील लेखक संघ की अध्यक्ष डॉ रानी श्रीवास्तव ने मंच संचालन की जिम्मेदारी संभाली और कॉलेज के प्राचार्य डॉ तपन कुमार शांडिल्य ने अतिथियों का स्वागत के साथ कहानी संग्रह की शीर्षक कहानी पर अपने विचार व्यक्त किया।इस अवसर पर शहर के कई गणमान्य साहित्यकार और साहित्य प्रेमी उपस्थित थे।जिसमें कवियत्री किरण सिंह, साहित्यकार डॉ मंगला रानी,कवि सिध्देश्वर,लोकगायिका नीतू नवगीत के अतिरिक्त समाजसेवी डॉ पी एस दयाल यति भी शामिल थे।
दलित बाभन अपने देशकाल की भावना पर लिखी गई कहानी है लेकिन लेखक कभी भावना में बहता नहीं। कहानी में न आदर्श है न समाधान। इन कहानियों में जीवन संघर्ष की कड़वी सच्चाई है। मृदुला बिहारी अपना यह वक्तव्य दे रही थीं शंभु पी सिंह के कथा संग्रह दलित बाभन के लोकार्पण एवं विचार गोष्ठी में।
मौके पर स्वागत करते हुए कॉलेज के प्राचार्य तपन कुमार शांडिल्य ने कहा कि दलित बाभन लिखकर लेखक ने दलितों को जागरूक करने की कोशिश की है। वहीं कासिम खुर्शीद ने कहा कि दलित बाभन में कंटाहा ब्राह्मण की दयनीय स्थिति को रेखांकित की गई है। नायिका कहती है कि दलित को तो कानूनी संरक्षण प्राप्त है लेकिन कंटाहा को वो भी नसीब नहीं।
राजकिशोर राजन ने कहा कि दलित बाभन कथा संग्रह भारतीय समाज में हो रहे आमूल-चूल परिवर्तन को रेखांकित किया गया है। शंभु जी की प्रत्येक कहानी में एक सवाल पाठकों के लिए छोड़ती है।
शिवनारायण ने कहा कि इस संग्रह में कहानियों का संग्रह में जिस शिल्प का प्रयोग किया गया है वह हमें विमलमित्र की याद दिलाती है। संग्रह में समाज के विभिन्न यथार्थ को उकेरने की सफल कोशिश की गई है।
रामवचन राय ने अपनी बात रखते हुए कहा कि शंभु जी की कहानियां बेलौस और संतुलित है। यही सबसे बड़ी उपलब्धि है।
कार्यक्रम का संचालन कर रही रानी श्रीवास्तव ने कहा कि इस संग्रह में दहेज और आरक्षण के मुद्दे को भी उठाया गया है।
अपनी लेखकीय बात रखते हुए शंभु पी सिंह ने कहा कि मेरी कहानी किसी को हँसाती है, रूलाती है। यही हमारी सफलता है।
अध्यक्षीय भाषण देते हुए शैलेश्वर सती प्रसाद ने अपनी बात रखी और राजकिशोर राजन ने धन्यवाद ज्ञापन किया।

बहुत अच्छा आयोजन। लेखक और प्रगतिशील लेखक संघ को बधाई
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