रूस-यूक्रेन युद्ध और अमेरिका : सुशील कुमार भारद्वाज
#रूस_यूक्रेन युद्ध 50 दिन से जारी है बाबजूद इसके कोई निर्णायक जीत- हार नहीं हुई। आधा दर्जन से अधिक बार बातचीत हो चुकी। विश्व के विभिन्न मंचों पर पक्ष-विपक्ष की बातें हो चुकी हैं। बाबजूद इसके परिणाम सिफर है। आखिर क्यों? क्या #यूक्रेन में इतनी सेना थी, इतने युद्ध-कौशल थे कि युद्ध इतना लंबा खींच गया या खींचता जा रहा है? दरअसल सही या गलत खबरें आ रही हैं कि यूक्रेन की मदद में लगभग 30 देश अप्रत्यक्ष रूप लगे हुए हैं। यूक्रेन की मदद में #अमेरिका की कुल युद्धक हथियार भंडार का एक तिहाई खाली हो चुका है। ऐसी परिस्थिति में क्यों नहीं मान लिया जाय कि युद्ध का असली खलनायक अमेरिका है जो अपने युद्ध उन्माद के वशीभूत हो यूक्रेन को मोहरा बनाकर अप्रत्यक्ष युद्ध कर रहा है सिर्फ #रूस को हर तरीके से कमजोर करने के लिए।
अमेरिका सोवियत संघ को विखंडित करने के लिए रूस से सदैव अपने रिश्ते को खराब करता रहा। विखंडन के बाद कुछ वर्ष तक अमेरिका शांत रहा। लेकिन ओसामा बिन लादेन के बहाने जो युद्ध उन्माद शुरू हुआ वह सद्दाम हुसैन के बहाने इराक की पूर्ण तबाही पर भी नहीं थमा है। और अभी रूस-यूक्रेन का बहाना कहां जाकर थमेगा कहना मुश्किल है। अब तो कभी -कभी लगता है कि इजराइल-फिलिस्तीन और उत्तर कोरिया-दक्षिण कोरिया के विवाद के बीच भी कोई अहम भूमिका अमेरिका की तो नहीं रहती, क्योंकि अमेरिका में सरकार किसी की भी हो, युद्ध नीति ही उनकी प्राथमिकता में होती है।
