बुधवार, 21 जुलाई 2021

रेणु की जीवनी की रचना-प्रक्रिया- भारत यायावर

 रेणु की जीवनी की रचना-प्रक्रिया 


भारत यायावर 



मैं पिछले चालीस वर्षों से प्रसिद्ध कथाकार फणीश्वरनाथ रेणु की जीवनी लिखने में लगा हुआ हूँ । 

यह जीवनी हिन्दी की श्रेष्ठ जीवनी साहित्य से थोड़ा हटकर है । 

मैं रेणु के जीवन प्रसंगों को याद करता रहता हूँ और उन्हें बेहद रोचक तरह से प्रस्तुत कर रहा हूँ ।

 यह वृहद आकार की जीवनी  लगभग हजार पृष्ठों की होगी । 

इसका पहला भाग पूरा हुआ है और प्रकाशन के पथ पर है। 

पहले भाग का नाम है व्यक्तित्व निर्माण और संघर्ष ।

यह रेणु के व्यक्तित्व निर्माण का समय था । वे तब पढ़ते बहुत थे, लेकिन उनके जीवन में भटकाव भी था । इसी भटकाव से एक रास्ता भी निकल रहा था । यह उनके भावी कथाकार रूप का प्रथम चरण था जिसपर चलकर  बहुत आगे जाना था ।

फिर संघर्ष के रास्ते पर चलकर उन्होंने अपने को ही आन्दोलन बना दिया । यह आन्दोलन राष्ट्रीय मुक्ति से लेकर नेपाल की मुक्ति तक का था । उनकी आँखें हर जगह रचनाशीलता की तलाश करती रहती । आन्दोलन रत जीवन की रचनाशीलता विलक्षण तो होगी ही । अपार जीवनानुभवों से भरा उनका उपन्यास आया और वैश्विक स्तर पर महत्ता ग्रहण करता चला गया ।


रेणु के संघर्षमय जीवन में स्वाधीनता का स्वप्न है। बीमारों की दुनिया है। नेपाल का मुक्ति संग्राम है। रचनाशीलता के पथ पर चलते रहने का संकल्प है। जन जीवन में जनजागरण की बेचैनी है। अभाव को वरण करने की तपिश है । संस्कृति के द्वारा साहित्य के क्षेत्र में करने की बहुत कुछ तड़प है। विरोध को झेलते हुए मुस्कुराते रहने का विलक्षण काव्य व्यक्तित्व है । आन्दोलन और सहजीवन का सामंजस्य है । भ्रष्ट और विद्रूप व्यवस्था के प्रति क्षोभ है । रहस्यमय प्रकृति और मनुष्य की खोज है।


रेणु की जीवनी एक असंभव की साधना है , जिसके कारण मरा  हजार मरण ! मर-मर कर उठकर खड़ा हुआ । देखा, बहुत लोग हैं जो उत्सव मना रहे हैं,  लेकिन मेरी पीर को एक नई पहचान मिल रही थी ।


भारत यायावर



भारत यायावर के फेसबुक से साभार।

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